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दीपावली- खुशियों का त्यौहार

दीपावली का त्यौहार- खुशियों को लाने का एक नया अवसर

हर साल हम दीपावली के अवसर पर अनेक कार्य करते हैं, जैसे कि- हम लक्ष्मी माता और गणेश जी की पूजा करते हैं, रिश्तेदारों से मिलते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं आदि। इन सभी कार्यों में एक है पटाखें जलाना। 

पटाखें जलाना खुशियाँ मनाने का एक नया तरीका बना था। परन्तु क्या आप सभी को लगता है की यह खुशियाँ मनाने का सही तरीका है?

यदि हम दीपावली शब्द का विग्रह करें तो हमें पता चलता है कि इसका अर्थ है, ‘दीपों की अवली’ यानी कि दीपों की पंक्ति। एक दीपक, खुशियों का, उत्साह का और आशा का प्रतीक है। पर यदि हम पटाखें जलाएँ तो क्या यह भी खुशियों, उत्साह और आशा का प्रतीक होगा?

मेरे ख्याल से पटाखें जलाना, खुशियाँ मनाने का सही तरीका नहीं है।

आजकल यदि हम बच्चों से पूछें कि वे दीपावली पर क्या करते हैं, तो अधिकतर बच्चों के उत्तर में ‘पटाखें जलाना’ शामिल होगा। कईं लोग तो पटाखें जलाने को ही दीपावली मनाने की परिभाषा समझते हैं। 

पटाखें जलाने से कोई फायदा तो नहीं, पर नुक्सान ज़रूर हुए हैं। उनसे निकला धुआँ, हमारी हवा को प्रदूषित करता है। यही हवा हमारे शरीर को नुक्सान पहुँचाती है। इसके कारण कईं बीमारियाँ उत्पन्न होती हैं।

ये सब बातें हम सब जानते हैं। फिर भी कईं लोग इन बातों पर ध्यान न देकर पटाखें जलाते हैं। इससे वे दूसरों को भी नुकसान पहुँचाते हैं। इसलिए हमें पटाखें नहीं जलाने चाहिए। 

आजकल लोग सोचते हैं की यदि हम पटाखें ही नहीं जलाएँगे तो दीपावली का पूरा मज़ा ख़तम हो जाएगा। परन्तु ऐसा नहीं है। हम सब खुशियाँ, मिठाइयाँ, तोहफ़े आदि बाँटकर भी तो दीपावली मना सकते हैं।

पटाखें जलाने से मिली ख़ुशी पलभर के लिए रहती है, जो पटाखें खतम होते ही समाप्त हो जाती है। यदि जो खर्चा हम पटाखों पर करते हैं, उनसे हम जरूरतमंदों को मिठाइयाँ, कपड़ें, आदि दें, तो उनके साथ-साथ हमें भी ख़ुशी मिलती है। यह ख़ुशी हमेश बानी रहती है। यदि सब लोग खुश रहें तो ही दीपावली और अन्य त्यौहारों का असली मज़ा है।

सिर्फ पटाखें जलाना ही दीपावली मनाने की परिभाषा नहीं है। मेरे ख्याल से तो सरकार को पूरे देश में पटाखें जलाना बंद कर देना चाहिए।

इस समय तो यह जरूरी है।  यदि इस बार दीपावली पर लोगों ने पटाखें जलाए, तो यह कोरोना के और दूसरे मरीजों के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है। इससे कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ सकती है।

क्या आप मेरी पटाखें न जलाने की बात से सहमत हैं? अगर हाँ, तो हमें इस बार दीपावली का त्यौहार एक अलग ढंग से मनाना चाहिए। जैसे कि- हम पटाखें न जलाकर, पेड़-पौधे उगाकर और अपना घर एक अनोखे तरीके से सजाकर दीपावली मना सकते हैं।

हम इस साल तो कोरोना के कारण अपने रिश्तेदारों से नहीं मिल सकते और गरीबों को मिठाइयाँ और कपड़े दान भी नहीं दे सकते, पर हम अगले साल ये सब करके और पटाखें न जलाकर दीपावली मना सकते हैं।

आखिर में मैं यह कहना चाहूँगा कि हमें दीपावली पर पटाखें न जलाकर, आपसी प्रेम बढ़ाना चाहिए और नफरत, घृणा, क्रोध, आदि भावनाओं को मन से हमेशा के लिए निकाल देना चाहिए। 

धन्यवाद 

लेखक- क्षितिज खण्डेलवाल

उम्र- 12

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